Wednesday, 4 March 2015

Kaagaz Ki Kashti

हलकी बारिश हो रही थी और दोपहर के 12 बजे पूरा अँधेरा छाया हुआ था। ऐसा लग रहा था मानो 7 बजने वाले है और अँधेरा होने को है।

मैं खिड़की के पास बैठी हुई, बारिश की हलकी हलकी बूंदों का मज़ा ले रही थी, तभी मेरी नज़र कुछ बच्चो पे जाती है।अपने ही दुनिया में मस्त। रोड के किनारे छोटा सा पानी का तालाब बना हुआ और उनके बुलंद आवाज़ "देख देख गोलू मेरा जहाज़, तुमसे आगे निकल रहा है". मैंने नज़ारे घुमाई तोह देखा, उनकी"कागज़ की कशतिया " पानी में तैर रही थी।

तभी 3 साल की नैना रोते हुए आती है। "राहुल भैया, मेरा जहाज़ बिच में फंस ग़या ":'(
राहुल नैना के आंसू पोचते हुए, "ऑफ हो तू रो मत, मैं अभी लाता हूँ ना "

नैना के आंसू देख कर लग रहा था, मैं जून और उसका जहाज़ निकाल कर दूँ।
तभी राहुल कहीं से लम्बी छड़ी ले कर आता है। उसके छोटे छोटे हाथ और छड़ी इतनी लम्बी।
वो पहली कोशिश करता है, लेकिन छड़ी उसकी कश्ती तक पहुचती तक नहीं।
उधर राहुल की कोशिशे, इधर मेरा बेचैन दिल उस कश्ती के लिए। तब वो कागज़ की कश्ती, कागज़ की कश्ती नहीं बल्कि कोई बेशकीमती चीज़ लग रही थी।

राहुल दूसरी बार कोशिश करता है और तभी वो जहाज़ तक पहुच जाता है। धीरे धीरे वो कश्ती को अपनी और खिचता है के तभी वो कही पे जा के अटक जाती है और मेरे मुह से निकलता है "Awww", उधर नैना दोनों गालो में हाथ रख के बैठ जाती है। राहुल : तू टेंशन मत ले, मैं ला के देता हूँ न।

राहुल ने तीसरी बार कोशिश किया, इस बार उसकी निगाहें एकदम सतर्क, अपने लाख्शय पे और मेरी भी। राहुल गहरी सांस लेता है, मेरी तोह साँसे रुक चुकी होती है। तभी राहुल की छड़ी सीधी कश्ती को चुटी है और वो उसे धीरे धीरे कर के लाता है। कश्ती तालाब के किनारे को चुटी है। राहुल उसे अपने हाथो में ले के "देख नैना बोल था न, टेंशन मत ले ". नैना राहुल को थैंक्यू बोल के गले लग जाती है।

ख़ुशी के मारे मैं भी अपने चिर से उठ जाती हूँ के तभी करंट आ जाता है और पीछे से किसी की आवाज़ आती है, " मैडम करंट आ गया, अब ऑडिट का काम ख़तम करे" ??
एक पल में सब कुछ बदल जाता है।
कुछ देर बाद जब मैं खिड़की से झाकती हूँ तब ना बच्चे थे और ना मेरा बच्चपन :(

कागज़ की कश्ती थी।
पानी का किनारा था।
खेलने की मस्ती थी। 
दिल यह आवारा था।
कहाँ आ गए इस समझदारी के दलदल में।
वो नादान बचपन ही कितना प्यारा था। 

Tuesday, 27 May 2014

Crafty Hand Made Card ^_^ by Sumi Hansda

Here is my first hand made card. This was made specially for my darling Laddu Pushpanjali Murmu on her b'day. 
I believe hand made things connect people from heart ♥ .
As I am not very good in painting, i used simple drawing. "Simple hai toh best hai. M I right??? " ;)
So here I took one blank card. Which is available on market. 2-3 Acrylic Colour and Tissue paper. And my card is ready.. :)


Here is my 2nd ... no actually this one is my 3rd hand made card and this is different from last two.
This ones for my darling sis Sujata Hansda . 

I took out middle part of the card and replaced it with the filter paper . As u can see upar part is transperant and some words are visible.
Just wanted to make one transperant card. And It came out beautiful.. hahaha.
I loved it
Hope u ll loved it too :-D


Sumi Hansda